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रक्षाबन्धन 19 अगस्त 2024

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रक्षाबन्धन 19 अगस्त 2024

रक्षाबन्धन 19 अगस्त 2024 रक्षाबन्धन एक हिन्दू त्यौहार है जो हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी भी कहते हैं।हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार 2024 में रक्षाबन्धन 19 अगस्त को मनाया जायेगा ।रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बन्धियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता , फौजी या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। अमरनाथ की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा गुरु पूर्णिमा से प्रारम्भ होकर रक्षाबन्धन के दिन सम्पूर्ण होती है। कहते हैं इसी दिन यहाँ का बर्फ का शिवलिंग भी अपने पूर्ण रूप को प्राप्त होता है। इस उपलक्ष्य में इस दिन अमरनाथ गुफा में प्रत्येक वर्ष मेले का आयोजन भी होता है। महाराष्ट्र में यह त्योहार नारियल पूर्णिमा के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन लोग नदी या समुद्र के तट पर जाकर अपने जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते हैं। इस अवसर पर समुद्र के स्वामी वरुण देवता को प्रसन्न करने के लिये नारियल अर्पित करने की परम्परा भी है। यही कारण है कि इस एक दिन के लिये मुंबई के समुद्र तट नारियल के फलों से भर जाते हैं। राजस्थान में रामराखी और चूड़ाराखी या लूंबा बाँधने का रिवाज़ है। रामराखी सामान्य राखी से भिन्न होती है। इसमें लाल डोरे पर एक पीले छींटों वाला फुँदना लगा होता है। यह केवल भगवान को ही बाँधी जाती है। चूड़ा राखी भाभियों की चूड़ियों में बाँधी जाती है। जोधपुर में राखी के दिन केवल राखी ही नहीं बाँधी जाती, बल्कि दोपहर में पद्मसर और मिनकानाडी पर गोबर, मिट्टी और भस्मी से स्नान कर शरीर को शुद्ध किया जाता है। इसके बाद धर्म तथा वेदों के प्रवचनकर्त्ता अरुंधती, गणपति, दुर्गा, गोभिला तथा सप्तर्षियों के दर्भ के चट (पूजास्थल) बनाकर उनकी मन्त्रोच्चारण के साथ पूजा की जाती हैं। उनका तर्पण कर पितृॠण चुकाया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद घर आकर हवन किया जाता है, वहीं रेशमी डोरे से राखी बनायी जाती है। राखी को कच्चे दूध से अभिमन्त्रित करते हैं और इसके बाद ही भोजन करने का प्रावधान है। रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्यार और स्नेह को बढ़ाने वाला त्योहार है. इस शुभ दिन पर बहन अपने भाई की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती है व् भाई आजीवन उस की रक्षा करते हुए साथ निभाने का एक पवित्र वचन लेता है. भाई भले छोटा हो या बड़ा राखी बढ़वा कर हमेशा अपनी बहन को आशीष देता है. दोनों के इस वचन की निशानी एक नाजुक सूती / रेशमी डोरा निभाता है. बहन को भाई की कलाई पर राखी बाधते समय निम्न मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए. येन बद्धो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ हिंदू कैलेंडर के अनुसार, रक्षाबंधन श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन (श्रावण पूर्णिमा) पर पड़ता है. इस साल भद्राकाल भद्राकाल पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ के साथ भद्रा की शुरुआत भद्राकाल की समाप्ति - 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:30 पर भद्रा मुख - 19 अगस्त को प्रातः 10:53 से दोपहर 12:37 तक भद्रा पूंछ - 19 अगस्त को प्रातः 09:51 से प्रातः 10:53 तक 19 अगस्त 2024 को दुपहर 13:30 तक भद्रा है . भद्रा में शुभ कार्य वर्जित है. राखी बांधने का सबसे अच्छा समय 13:30 से 21:07. तक होगा Divya Jyotti Astro And Vaastu Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja ABOHAR / LUDHIANA https://divyajyotiastro.in/ 9855332140