Shradh Paksh 2024
पितरों को तृप्त करे श्राद्ध
आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक पितृपक्ष में श्राद्ध तर्पण पंचमहायज्ञ आदि का विधान है . हिंदू धर्म ग्रंथों में श्राद्ध आदि का विवेचन अत्यंत विस्तार के साथ किया गया है श्राद्ध की यह धारणा है कि प्रेत और पितर की आत्म तृप्ति के लिए श्रद्वापूर्वक जो अर्पित किया जाए वह श्राद्ध है. हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि वर्ष की बसंत ग्रीष्म और वर्षा देवताओं की और शरद हेमंत और शिशिर ऋतुएँ पितरों की होती है हमारा एक माह पितरों के लिए एक दिन माना जाता है पितृ लोक की दृष्टि से हमारे 15 दिन उनका एक दिन माना जाता है और बाकी 15 दिन उनकी एक रात्री होती है शुक्ल पक्ष की अष्टमी तक पितरों का दिन होता है इसी अवधि के बीच में अमावस्या पडती है जो पितरों के लिए दिन का मध्य भाग है अतएव प्रति अमावस्या को दुपहर में श्राद्धकर्म करने का विधान है इसे दर्श श्राद्ध कहते है श्राद्ध या पितरों की आराधना दो प्रकार से हो सकती है एक तिल अर्पण अर्थात जल के साथ तिल मिलाकर पितरों के नाम से जल छोडना इसी को तिलांजलि कहते है.दूसरे प्रकार का श्राद्ध हवन कर्म के साथ होता है पितरों के लिए हवन कुंड में अन्न घी आदि वस्तुएं मंत्रोच्चारण समेत डाली जाती है इसे पार्वण श्राद्ध कहते है इसी अवसर पर ब्राह्मण को पितरों के नाम से भोजन कराया जाता है प्रतिवर्ष 13 ऐसे मौके आते है जिनमें पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा गया है ये समय है प्रतिमास की अमावस्या एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य संक्राति का दिन सूर्य ग्रहण अथवा चंद्र ग्रहण का समय और माघ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी का दिन इसी तरह के 13 दिन अवसर बताए गए है इनमें पितृ पक्ष का महत्व अधिक है पितृ पक्ष में सूर्य कन्या राशि के दसवें अंश पर आता है और वहां से तुला राशि की और बढता है इसे कन्यागत सूर्य कहते है जब सूर्य कन्यागत हो तो उस समय पितरों का श्राद्व करना अत्यधिक महत्वपूर्ण कहा गया है पितृ पक्ष में गजछाया नामक एक समय आता है जब सूर्य हस्त नक्षत्र पर और चंद्र मघा नक्षत्र पर चल रहा हो तो उस समय को गजछाया कहते है यह आश्विन मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को होता है ऐसे समय में श्राद्धकर्म करने की बडी महिमा कही गई है वसु, रुद्र और आदित्य श्राद्ध देवता है हमारे श्राद्धकर्म से वे तृप्त होकर मनुष्यों के पितरों को भी तृप्त करते है मनुष्यों की आत्मा कहीं भी हो किसी भी लोक में अथवा किसी भी योनि में हो वहां तक मनुष्य के द्वारा किए गए पिंडदान को पंहुचा देते है हमारे ऋषिओं का कथन है कि श्राद्ध देवता श्राद्धकर्ता को दीर्घ जीवन आज्ञाकारी संतान धन विद्या संसार के सुख भोग स्वर्ग तथा दुर्लभ मोक्ष भी प्रदान करते है श्राद्ध किसी दूसरे के घर में कभी नही करना चाहिए जिस भूमि पर किसी व्यक्ति का स्वामित्व न हो उस भूमि पर श्राद्ध किया जा सकता है. शास्त्रों में उल्लेख है कि दूसरे के घर में जो श्राद्ध किया जाता है उससे श्राद्ध करने वाले के पितरों को कुछ नही प्राप्त होता इसलिए तीर्थ में किए गए श्राद्ध से आठ गुना पुण्य अपने घर में श्राद्ध करने से होता है. यदि किसी विवशता के कारण दूसरे के घर अथवा भूमि पर श्राद्ध करने की मजबूरी हो तो श्राद्व से पूर्व उस स्थान का किराया अवश्य दे दें. श्राद्ध का प्रावधान मध्याह्र काल में है प्रात अथवा सायंकाल श्राद्ध नहीं करना चाहिए शाश्त्रों के अनुसार इस सृष्टि को चलाने में देव, ऋषि और पितर अपने अपने ढंग से कार्य करते हैं. वशिष्ठ विश्वामित्र आदि महर्षि सप्तऋषि कहलाते हैं इन ऋषियों के प्रभाव से मनुष्य में ज्ञान का प्रकाशन होता रहा है. पितृगण मनुष्य के शरीर के निर्माण में योग देने वाले है इनके प्रति आदर और सम्मान प्रकट करना हमारा कर्तव्य है पितृ पक्ष के प्रत्येक दिन श्राद्ध करना चाहिए सामान्य रुप से तिल अर्पण के द्वारा इसे संपन्न किया जा सकता है लेकिन जिस तिथि को माता या पिता का स्वर्गवास हुआ हो उस तिथि को विशेष रुप से श्राद्ध कर्म करना चाहिए वेदों के पश्चात हमारे स्मृतिकारों तथा धर्माचार्यों ने श्राद्ध संबंधी विषयों को बहुत अधिक व्यापक बनाते हुए जीवन के प्रत्येक अंग के साथ इसका सम्बन्ध जोड़ा है जो वास्तव में धर्म हेतु ही है अत: सनातन धर्म की इन वैदिक मान्यताओं को स्थापित करते हुए श्राद्ध आदि कर्मों में तत्पर होना संस्कृति का परिपोषक है वही भगवान की कृपा प्राप्त करवाने वाला है .
इस वर्ष (2024) में आने वाले श्राद्ध की तिथियां
पूर्णिमा का श्राद्ध - 18 सितंबर 2024 (बुधवार))
प्रतिपदा का श्राद्ध - 18 सितंबर 2024 (बुधवार)
द्वितीया का श्राद्ध - 19 सितंबर 2024 (गुरुवार)
तृतीया का श्राद्ध - 20 सितंबर 2024 (शुक्रवार)
चतुर्थी का श्राद्ध - 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
महा भरणी - 21 सितंबर 2024 (शनिवार)
पंचमी का श्राद्ध - 22 सितंबर 2024 (रविवार)
षष्ठी का श्राद्ध - 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
सप्तमी का श्राद्ध - 23 सितंबर 2024 (सोमवार)
अष्टमी का श्राद्ध - 24 सितंबर 2024 (मंगलवार)
नवमी का श्राद्ध - 25 सितंबर 2024 (बुधवार)
दशमी का श्राद्ध - 26 सितंबर 2024 (गुरुवार)
एकादशी का श्राद्ध - 27 सितंबर 2024 (शुक्रवार)
द्वादशी का श्राद्ध - 29 सितंबर 2024 (रविवार)
मघा श्राद्ध - 29 सितंबर 2024 (रविवार)
त्रयोदशी का श्राद्ध - 30 सितंबर 2024 (सोमवार)
चतुर्दशी का श्राद्ध - 1 अक्टूबर 2024 (मंगलवार)
सर्वपितृ अमावस्या - 2 अक्टूबर 2024 (बुधवार)
Divya Jyoti Astro And Vaastu
Astrologer Kanchan Pardeep Kukreja
ABOHAR / LUDHIANA
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