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होलाष्टक अशुभ क्यों हैं ये 8 दिन?

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होलाष्टक अशुभ क्यों हैं ये 8 दिन?

होली की सूचना होलाष्टक से प्राप्त होती है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक के समय को धर्मशास्त्रों में होलाष्टक का नाम दिया गया है। ज्योतिष के ग्रंथों में ‘होलाष्टक’ के आठ दिन समस्त मांगलिक कार्यों में निषिद्ध कहे गए हैं। इस साल होलाष्टक 7  मार्च 2025 से शुरू हो रहा है। माना जाता है इस दौरान शुभ कार्य करने पर अपशकुन होता है। इस मान्यता के पीछे यह कारण है कि, भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर कामदेव को शिव जी ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को भष्म कर दिया था। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते हैं, इनके भष्म होने पर संसार में शोक की लहर फैल गयी थी। कामदेव की पत्नी रति द्वारा शिव से क्षमा याचना करने पर शिव जी ने कामदेव को पुनर्जीवन प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने खुशी मनायी। होलाष्टक का अंत दुलहंडी के साथ होने के पीछे एक कारण यह माना जाता है। होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य प्रतिबंधित रहने के पीछे धार्मिक मान्यता के अलावा ज्योतिषीय मान्यता भी है। ज्योतिष के अनुसार अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल तथा पूर्णिमा को राहु उग्र रूप लिए हुए रहते हैं। इससे पूर्णिमा से आठ दिन पूर्व मनुष्य का मस्तिष्क अनेक सुखद व दुःखद आशंकाओं से ग्रसित हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को अष्ट ग्रहों की नकारात्मक शक्ति के क्षीण होने पर सहज मनोभावों की अभिव्यक्ति रंग, गुलाल आदि द्वारा प्रदर्शित की जाती है। सामान्य रूप से देखा जाए तो होली एक दिन का पर्व न होकर पूरे आठ दिन का त्योहार है। भगवान श्रीकृष्ण आठ दिन तक गोपियों संग होली खेले और दुलहंडी के दिन अर्थात होली को रंगों में सने कपड़ों को अग्नि के हवाले कर दिया, तब से आठ दिन तक यह पर्व मनाया जाने लगा। होलाष्टक पूजन विधि होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पहले होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारंभ का दिन भी कहा जाता है। जिस गांव, क्षेत्र या मौहल्ले के चौराहे पर यह होली का डंडा स्थापित किया जाता है, होली का डंडा स्थापित होने के बाद संबंधित क्षेत्र में होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है। आज मैं आप लोगों को बताऊंगा कि होली से ठीक 8 दिन पहले यानी कि होलाष्टक वाले समय आप लोग भूल कर भी क्या क्या काम ना करें | होली का त्योहार रंगो का त्यौहार होता है और लोग इसको खुशी और उल्लास के साथ मनाते हैं मगर होली से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाता है जो कि एक बहुत अपवित्र समय काल माना गया है | होलाष्टक के समय कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है और होलिका दहन के बाद तक होलाष्टक चलता है | होलाष्टक के समय लोग काला जादू तंत्र मंत्र यंत्र करवाते हैं और शत्रु बाधा भी इस समय बहुत होती है | हिरण्यकश्यप में प्रह्लाद को एक दिन जलाने की कोशिश करी थी और उसका कार्यक्रम 8 दिन पहले शुरु कर दिया था ताकि होलीका जो कभी भी नहीं चल सकती थी वह प्रह्लाद को अपनी गोद पर लेकर बैठ गई थी और भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर प्रहलाद की रक्षा करी थी इसलिए होलाष्टक का समय काल बुरा समय काल होता है होलिका दहन की पूजा के लिए सामान गाय के गोबरकी थापियाँ चाँद सूर्य सहित रोली, फूल, फूल माला फल गुड़ सूखा नारियल, अक्षत(चावल), 5 साबुत हल्दी, बताशे, कच्चा सूत, जल का कलश चंदन, पांच प्रकार का अनाज, गुलाल हरी साबुत मूंग कनक की बाली 5